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जवानों की मदद से अबूझमाड़ के सुदूर गांव में पहली बार पहुंची 108 संजीवनी एम्बुलेंस, चलने-फिरने में असमर्थ महिला को पहुंचाया जिला अस्पताल, लंबे समय से थी बीमार

नारायणपुर। नक्सल प्रभावित और सुदूर अबूझमाड़ क्षेत्र के धुरबेडा गांव में स्वास्थ्य सुविधा की एक बड़ी पहल सामने आई है। जहां लंबे समय से बीमार चल रही 38 वर्षीय चैति को जीवनदान देने के लिए पहली बार 108 संजीवनी एम्बुलेंस गांव में पहुंची।

बता दें कि धुरबेडा निवासी चैति खून की भारी कमी और अत्यधिक कमजोरी के कारण चलने-फिरने में असमर्थ थीं। अबूझमाड़ क्षेत्र होने के कारण यहां न तो स्वास्थ्य सुविधा है और न ही सड़क या परिवहन की कोई व्यवस्था, जिसके कारण मरीज अस्पताल तक पहुँच नहीं पा रही थीं।

जब गांव में खुले नए फोर्स कैंप के जवानों की नजर बीमार महिला पर पड़ी। जवानों ने तुरंत स्थिति की गंभीरता को समझते हुए वायरलेस के माध्यम से 108 संजीवनी एम्बुलेंस से संपर्क किया। 108 जिला प्रबंधक गौतम कुमार ने मौके की संवेदनशीलता को देखते हुए खुद टीम को गांव भेजने का निर्णय लिया।

पायलट मिलन उसेंडी और ईएमटी कमलेश की टीम ने बिना पुल वाले नालों, खराब रास्तों और फंसने के खतरे के बावजूद गांव तक एम्बुलेंस पहुँचाई। गांव में मरीज का पता लगाने में काफी कठिनाई हुई, लेकिन टीम ने हिम्मत नहीं हारी। ईएमटी ने घर पहुँचकर मरीज के वाइटल्स चेक किए और उसे सुरक्षित रूप से एम्बुलेंस में शिफ्ट कर जिला अस्पताल में भर्ती कराया।

धुरबेडा में पहली बार 108 एम्बुलेंस पहुँचने से ग्रामीणों में खुशी और भरोसा देखने को मिला। अबूझमाड़ के दूरदराज क्षेत्र में भी स्वास्थ्य सुविधा की उम्मीद जगी है। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना की और इसे जीवनरक्षक कदम बताया है।

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