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पंचायतों में क्यूआर कोड आधारित मनरेगा पहल को पुरस्कार, मध्यस्थों पर निर्भरता कम कर व्यवस्था को बनाया पारदर्शी…

रायपुर। छत्तीसगढ़ में महात्मा गांधी नरेगा कार्यों को पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए क्यूआर कोड और जीआईएस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है. इससे ग्राम पंचायतों में ग्रामीण एक साधारण स्कैन से मनरेगा के तहत सभी स्वीकृत कार्यों, परियोजनाओं व खर्च पर नजर रख रहे हैं.

पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा अंतर्गत लागू क्यूआर कोड आधारित सूचना स्वप्रकटिकरण व्यवस्था ने नागरिक केंद्रित शासन को नई मजबूती दी है. क्यूआर कोड के माध्यम से ग्रामीणों को वास्तविक समय की योजना व जानकारी उपलब्ध कराकर इस पहल ने मध्यस्थों पर निर्भरता कम की और प्रदेश की 11 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता को सुदृढ़ किया.

बीते 1 सितंबर से प्रारंभ क्यूआर कोड को अब तक 3.70 लाख से अधिक स्कैन किया जा चुका है. चुटकियों में जानकारी देने वाली क्यूआर आधारित मनरेगा पहल को विशेष श्रेणी में मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025-26 मिला है.

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार द्वारा प्रारंभ की गई क्यूआर कोड आधारित इस प्रणाली में मनरेगा से संबंधित सभी जानकारी उपलब्ध हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना के किस हितग्राही को 90 दिन का रोजगार मिला या आवास की सूची, उसकी जानकारी आसानी प्राप्त हो रही है. प्रत्येक माह आयोजित ग्रामसभा, चावल उत्सव व रोजगार दिवस के अवसर पर इस क्यूआर कोड प्रणाली का प्रचार किया जा रहा है. बड़ी संख्या में लोग क्यूआर कोड को स्कैन कर मनरेगा की जानकारी ले रहे हैं.

छत्तीसगढ़ के मनरेगा आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने मनरेगा में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई तकनीकी पहल शुरू की है. हर ग्राम पंचायत का क्यूआर कोड बनाकर इसे पंचायत भवन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगाए हैं. इसे मोबाइल से स्कैन कर ग्रामीण पिछले तीन वर्षों में गांव में किए मनरेगा कार्यों की पूरी जानकारी और खर्च का विवरण प्राप्त कर रहे हैं. ग्रामीण मनरेगा के तहत स्वीकृत परियोजनाओं का विवरण, बजट व खर्च की स्थिति की जानकारी ले सकते हैं.

शिकायतों में आई कमी

अधिकारियों का कहना है कि क्यूआर कोड आधारित प्रणाली से मनरेगा कार्यों को लेकर शिकायतों में भी 50 प्रतिशत तक की कमी आई है. वहीं, आरटीआई के अंतर्गत आवेदन भी कम लगाए जा रहे हैं. इस नवाचार पर पंचायत विभाग ने कोई बड़ी राशि खर्च नहीं की है. सिर्फ ग्राम पंचायतों में क्यूआर कोड की फोटोकॉपी चिपकाई है.

क्यूआर कोड पर भरोसा

ग्रामीण पहले से ही क्यूआर कोड से परिचित हैं. पारदर्शिता के लिए निरंतर प्रयासों के चलते एक अभूतपूर्व विचार आया कि मनरेगा डेटा तक पहुंच खोलने के लिए क्यूआर कोड का उपयोग क्यों न किया जाए? इसके बाद इस परियोजना को हरी झंडी दी गई और इसे पूरे राज्य में लागू किया गया.

क्यूआर से बढ़ेगी पारदर्शिता

मनरेगा आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा ने बताया कि प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में उत्सुकता, जागरूकता से बिना किसी व्यय के क्यूआर कोड अधारित मनरेगा प्रणाली की शुरुआत की गई है. 1 सितंबर से आरंभ इस क्यूआर कोड को अब तक 3.70 लाख से अधिक बार स्कैन किया गया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है.

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