Hindi newsBusinessNational

RBI Repo Rate: रेपो रेट स्थिर, लोन नहीं होंगे महंगे, 6.9% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान

RBI Repo Rate : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई की वित्त वर्ष की पहली बैठक (RBI meeting) 8 अप्रैल को हुई। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के नतीजों की जानकारी RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​(Sanjay Malhotra) ने दी। भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष-2026-27 की पहली मीटिंग में रेपो रेट में बदलाव नहीं करने का फैसला लिया। इसे 5.25% पर बरकरार रखा गया है। यानी लोन महंगे नहीं होंगे और आपकी EMI भी नहीं बढ़ेगी। वहीं वित्त वर्ष-2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.9 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। यह आंकड़ा FY26 में दर्ज 7.6 फीसदी की रियल GDP ग्रोथ से कम है। जबकि महंगाई दर के 4.6 फीसदी रहने की उम्मीद जताई है। यह आरबीआई के 4 फीसदी के लक्ष्य के करीब है।

इससे पहले फरवरी में भी रेपो रेट में बदलाव नहीं हुआ था। RBI ने आखिरी बार दिसंबर 2025 में ब्याज दर 0.25% घटाकर 5.25% की थी। RBI जिस रेट पर बैंकों को लोन देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं। जब RBI रेपो रेट घटाता है तो बैंक इस फायदे को ग्राहकों तक पहुंचाते हैं।

मौजूदा वित्त वर्ष के लिए पहली द्वि-मासिक मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा करते हुए, RBI MPC ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.25 फीसदी पर बनाए रखने का फैसला किया, और एक न्यूट्रल स्टांस अपनाया। यह फैसला छह सप्ताह से चल रहे US/इजराइल-ईरान संघर्ष में संघर्ष-विराम के बाद वैश्विक सुधार की उम्मीदों के बीच लिया गया है। नीतिगत फैसले की घोषणा करते हुए RBI गवर्नर ने कहा कि पिछली नीतिगत बैठक के बाद से, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बढ़ी हैं। गवर्नर ने कहा कि हाई फ्रिक्वेंसी इंडीकेटर्स बताते हैं कि विकास की गति मजबूत बनी हुई है, लेकिन मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का इस गति पर असर पड़ने की संभावना है। जिसे देखते हुए उन्होंने मौजूदा वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही (Q1 और Q2) के लिए ग्रोथ के अनुमान को घटाकर क्रमशः 6.9 फीसदी और 6.8 फीसदी कर दिया। इस बीच, वर्ष की दूसरी छमाही में विकास की गति तेज होने की उम्मीद है, जिसमें तीसरी तिमाही (Q3) के लिए अनुमान 7 फीसदी और चौथी तिमाही (Q4) के लिए 7.2 फीसदी रखा गया है।

नए वित्त वर्ष के लिए, CPI महंगाई दर का अनुमान 4.6 फीसदी लगाया गया है, जिसमें तिमाही अनुमान पहली तिमाही (Q1) के लिए 4.0 फीसदी और दूसरी तिमाही (Q2) के लिए 4.4 फीसदी हैं। जहां पहली तिमाही (Q1) के लिए अनुमान वही बना हुआ है, वहीं दूसरी तिमाही (Q2) के लिए इसे पहले के 4.2 फीसदी से मामूली रूप से बढ़ाकर संशोधित किया गया है। महंगाई Q3 में बढ़कर 5.2% होने का अनुमान है, जिसके बाद Q4 में यह घटकर 4.7% हो जाएगी। कोर महंगाई 4.4 फीसदी रहने का अनुमान है। सेंट्रल बैंक ने बताया कि यह पहली बार है जब इतना विस्तृत ब्योरा पेश किया गया है, जो कुछ स्टेकहोल्डर्स की मांग को दर्शाता है

रेपो रेट क्या है, इससे लोन कैसे सस्ता होता है?

RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अक्सर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं यानी बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं।

ब्याज दर में बदलाव नहीं करने की वजह

RBI गवर्नर के मुताबिक, महंगाई में फिर से उछाल आने का खतरा अभी टला नहीं है। खराब मौसम और बेमौसम बारिश की वजह से फल, सब्जियों और अनाज की कीमतों में बढ़ोतरी होने की आशंका है। ईरान-इजरायल जंग की वजह से सप्लाई चैन पर बुरा असर पड़ रहा है। RBI अभी ‘रुको और देखो’ की नीति अपना रहा है। ग्लोबल मार्केट में मची उथल-पुथल को देखते हुए आरबीआई जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहता। बैंक अभी दुनिया भर के आर्थिक हालातों पर नजर रखना चाहता है। इसी वजह से ब्याज दर में बदलाव नहीं किया गया।

Related Articles

Back to top button