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तेजस इंजन अब देश में तैयार होंगे: GE एयरोस्पेस–HAL समझौते से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा

अमेरिकी डिफेंस कंपनी GE एयरोस्पेस और भारत की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के बीच फाइटर जेट इंजन बनाने की डील पर जल्द मुहर लग सकती है। दोनों कंपनियों ने लड़ाकू विमानों के लिए F414 जेट इंजन के को-प्रोडक्शन को लेकर तकनीकी मामलों पर सहमति जताई है। मंगलवार को कंपनी ने बताया कि पिछले तीन साल से चल रही बातचीत में अब बड़ी प्रगति हुई है।

GE एयरोस्पेस और HAL के बीच साल 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान F414 इंजन को लेकर एक शुरुआती समझौता हुआ था। तब से दोनों पक्ष इसके बारीक पहलुओं और तकनीक ट्रांसफर (ToT) पर चर्चा कर रहे थे। ताजा अपडेट के मुताबिक, दोनों कंपनियों ने तकनीकी मामलों पर आपसी सहमति बना ली है। यह भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत डिफेंस सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

वायुसेना के लिए डोमेस्टिक डिपो बनेगा, विदेशों पर निर्भरता खत्म होगी.

F414 डील के अलावा GE एयरोस्पेस ने सोमवार को भारतीय वायुसेना (IAF) के साथ एक और महत्वपूर्ण कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। इस समझौते के तहत तेजस फाइटर जेट के इंजन अब भारत में ही रिपेयर किये जायेंगे, इसका डिपो यहीं बनाया जाएगा. यह डिपो F404-IN20 इंजन के लिए होगा. इन्हीं इंजनों से तेजस एलसीए विमान उड़ते हैं. डिपो को वायुसेना चलाएगी. इसके लिए GE ऐरोस्पेस तकनीकी मदद करेगा. इस कदम से विदेशों पर निर्भरता भी कम होगी. पहले इंजन को विदेश भेजना पड़ता था. इसमें काफी समय लगता था. कई बार विमान लंबे समय तक खड़े रहते थे. अब इनकी मरम्मत भारत में ही होगी.

समय की भी होगी बचत.

इस समझौते के बाद तेजस बेड़े को बड़ा फायदा होगा. इंजन खराब होने पर जल्दी ठीक होंगे. इससे विमान जल्दी ऑपरेशन में लौट पाएंगे. ज्यादा विमान उड़ान के लिए तैयार रहेंगे. इससे वायुसेना की ताकत बढ़ेगी. बता दें कि, यह डिपो भारत में ही बनेगा. लेकिन इसका संचालन वायुसेना करेगी. GE एरोस्पेस ट्रेनिंग और तकनीकी सहयोग देगा. स्पेयर पार्ट्स और जरूरी उपकरण मिलेंगे. यहां मरम्मत अंतरराष्ट्रीय मानकों पर होगी. इससे देश में तकनीकी कौशल भी बढ़ेगा. कंपनी पहले भी हजारों लोगों को ट्रेनिंग दे चुकी है.

आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम.

इस फैसिलिटी से विदेशी निर्भरता घटेगी. देश की तकनीकी क्षमता बढ़ेगी और मजबूत एविएशन सपोर्ट सिस्टम तैयार होगा. कंपनी भारत में इंजीनियरिंग को भी बढ़ावा दे रही है. डेढ़ सौ से ज्यादा इंजीनियर तैयार किए गए हैं. कंपनी ने पुणे में 5000 से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग भी दी हैं.

40 साल पुरानी साझेदारी.

पिछले 40 साल से जीई भारत के साथ काम कर रही है. कंपनी के इंजन कई सैन्य प्लेटफॉर्म में इस्तेमाल होते हैं. बोइंग पी 8 आई, एम एच -60 आर और अपाचे हेलीकॉप्टर में भी इसी के इंजन लगे हैं.समुद्री जहाजों में भी कंपनी की तकनीक है. विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत , शिवालिक क्लास फ्रिगेट में जीई के इंजन लगे हैं. कंपनी का कहना है कि यह सहयोग का अगला चरण है. दोनों के बीच चार दशकों से साझेदारी है. यह समझौता रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगा.

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