आवारा कुत्तों पर SC का आदेश: डॉग लवर्स और NGO की याचिकाएं खारिज, खूंखार कुत्तों को मारने की इजाजत

Supreme Court Verdict On Stray Dogs Case: आवारा कुत्तों पर देश के शीर्ष न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने सुप्रीम फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर डॉग लवर्स और एनजीओ की याचिकाओं को सभी खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक संस्थानों के परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश नहीं बदलेगा। आवारा कुत्तों पर पुराना आदेश (2025 का) ही लागू रहेगा। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने बीमार और खतरनाक कुत्तों को मारने पर भी विचार करने को कहा है। शीर्ष न्य़ायालय ने कहा कि खतरनाक और बीमार कुत्तों को इंजेक्शन लगाकर मारा जा सकता है। लोगों की जान की सुरक्षा बेहद जरूरी है। जो अफसर निर्देश न माने, उस पर अवमानना का केस चलाया जाए।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद आवारा कुत्तों पर फिलहाल सुनवाई बंद कर दी गई है। कोर्ट ने कहा है कि वह 17 नवंबर को हर राज्य की कंप्लायंस रिपोर्ट देखेगा। सुनवाई के दौरान आवारा कुत्तों के मामले में नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से कहा कि उसके फैसले का सही से पालन नहीं किया गया। इसे वह कोर्ट की अवमानना के तौर पर देखता है।
जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि बच्चों, बुजुर्गों को कुत्ते काट रहे हैं। हम ऐसी स्थिति से आंखें नहीं मूंद सकते। उन्होंने कहा कि एनिमल वेलफेयर बोर्ड के SOP के खिलाफ सभी आवेदन हम खारिज कर रहे हैं। अदालत ने आवारा कुत्तों के पुनर्वास और नसबंदी को लेकर पहले दिए गए निर्देशों को वापस लेने की मांग वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। बेंच ने कहा कि राज्यों को एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स का पालन करना चाहिए था। तब ऐसी स्थिति नहीं बनती। सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और इकोलॉजिकल बैलेंस का मामला है। देश के शीर्ष न्यायालय ने कहा कि हमारे 7 नवंबर, 2025 के आदेश का राज्यों ने सही से पालन नहीं किया। इसे अवमानना की तरह देखा जाएगा।



