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कॉकरोच जनता पार्टी: भारत के नवीनतम राजनीतिक व्यंग्य आंदोलन का ट्रिगर, घोषणापत्र और भविष्य

डिजिटल क्रांति: क्या है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और क्यों सोशल मीडिया पर कांप रही हैं मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां?

30 वर्षीय अभिजीत दिपके ने अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्थित बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (PR) में अपनी मास्टर्स की पढ़ाई अभी पूरी ही की थी कि भारत में एक अदालती टिप्पणी ने इंटरनेट पर भूचाल ला दिया। एक अदालती सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की एक कथित मौखिक टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसमें उन्होंने बेरोजगार भारतीय युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ (तिलचट्टों) और ‘पैरासाइट्स’ (परजीवियों) से कर दी थी।

साल 2023 में उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए दिपके ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक गूगल फॉर्म का लिंक साझा करते हुए सभी ‘कॉकरोच’ युवाओं के लिए एक नए डिजिटल मंच की घोषणा कर दी। दिपके ने तंज कसते हुए लिखा:

“यदि आप शामिल होना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। पात्रता मानदंड: • बेरोजगार • आलसी • हर समय ऑनलाइन रहने वाले • पेशेवर रूप से भड़ास निकालने की क्षमता।”

दिपके को इस बात का अंदाज़ा भी नहीं था कि उनका यह मज़ाक भारत में एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले लेगा।

महज 5 दिनों में बीजेपी को पछाड़ा, इंस्टाग्राम पर 1.3 करोड़ पार

अभिजीत के मुताबिक, लिंक पोस्ट करने के कुछ ही घंटों के भीतर गूगल फॉर्म पर 15,000 रजिस्ट्रेशन हो गए। देखते ही देखते इस मुहिम को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का नाम मिल गया। इसका अपना एक्स हैंडल, इंस्टाग्राम पेज और एक वेबसाइट भी तैयार हो गई।

इस पोस्ट के महज पांच दिन बाद, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ इंटरनेट पर हाल के वर्षों के सबसे बड़े भारतीय राजनीतिक अभियानों में से एक बन चुकी है। वर्तमान में इसकी वेबसाइट पर 6 लाख से अधिक लोग पंजीकरण करा चुके हैं। वहीं इसके इंस्टाग्राम अकाउंट ने 1.3 करोड़ (13 Million) से अधिक फॉलोअर्स का आंकड़ा पार कर लिया है, जो कि दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आधिकारिक इंस्टाग्राम फॉलोअर्स (8.7 मिलियन) से कहीं ज्यादा है।

हालांकि, इस बढ़ती लोकप्रियता के बीच 21 मई को एक ‘कानूनी मांग’ के बाद भारत में CJP के एक्स (ट्विटर) हैंडल (जिसके 2 लाख फॉलोअर्स थे) को ब्लॉक कर दिया गया है। दूसरी ओर, विवाद बढ़ता देख सीजेआई सूर्यकांत ने इस बयान से खुद को अलग करते हुए कहा है कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया था और वे केवल फर्जी डिग्री धारकों की बात कर रहे थे।

नीट (NEET-UG) विवाद और युवाओं का गुस्सा

CJP का यह मज़ाक भारतीय युवाओं के दिल को छू गया, जिसके पीछे हालिया प्रशासनिक विफलताएं हैं। दिपके के अनुसार, इस अभियान के 94 प्रतिशत फॉलोअर्स भारत से हैं। यह वर्चुअल आंदोलन ऐसे समय में खड़ा हुआ है जब मई 2026 में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) को रद्द कर दिया गया था, जिससे लगभग 2.3 मिलियन छात्र प्रभावित हुए। इसके बाद व्हाट्सएप के जरिए हुए बड़े पैमाने पर पेपर लीक की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई। CJP ने इस मामले में जवाबदेही तय करने और भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है।

क्या है CJP का चुनावी घोषणापत्र (Manifesto)?

सत्ताधारी दल ‘बीजेपी’ के नाम पर तंज कसते हुए बनाई गई CJP की वेबसाइट खुद को “आलसी और बेरोजगारों की आवाज़” बताती है। इसके घोषणापत्र में बेहद गंभीर मांगें शामिल हैं, जैसे:

  • मुख्य न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त (Retirement) होने के बाद उनके राज्यसभा सीट लेने पर प्रतिबंध।

  • संसद की कुल संख्या बढ़ाए बिना महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण।

  • दलबदलू नेताओं पर चुनाव लड़ने के लिए 20 साल का प्रतिबंध।

अभिजीत दिपके ने अमेरिका से लाइवमिंट को बताया, “यह साफ तौर पर भारत के युवाओं की हताशा को दर्शाता है। उन्हें लगता है कि कोई भी राजनीतिक दल उनके बारे में नहीं सोच रहा है। वे बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।” (गौरतलब है कि ईरान युद्ध के कारण भारत में पेट्रोल की कीमतें बढ़ी हैं और भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर ₹97 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया है।)

बांग्लादेश और नेपाल जैसे आंदोलनों से तुलना पर क्या बोले संस्थापक?

भारत में कई लोग इस अभियान की तुलना बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के हालिया ‘जेन जेड’ (Gen Z) आंदोलनों से कर रहे हैं, जिन्होंने वहां की सरकारों को उखाड़ फेंका। नेपाल में सितंबर 2025 में हुए भ्रष्टाचार विरोधी छात्र आंदोलनों के कारण प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा था, जिसके बाद मार्च 2026 में पूर्व रैपर बालेंद्र शाह के नेतृत्व में नई सरकार बनी।

हालांकि, दिपके ने इन हिंसक आंदोलनों से तुलना को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा:

“मैं यह बिल्कुल साफ कर देना चाहता हूं, ऐसी तुलना करके भारत के युवाओं का अपमान न करें। इस देश के युवा बहुत अधिक परिपक्व, जागरूक और राजनीतिक रूप से समझदार हैं। वे अपने संवैधानिक अधिकारों को समझते हैं और शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीकों से अपना विरोध दर्ज कराएंगे।”

समर्थन और आलोचना का दौर

इस डिजिटल मुहिम को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा, कीर्ति आज़ाद और बॉलीवुड की मशहूर हस्तियों जैसे अनुराग कश्यप और कोंकणा सेन शर्मा का समर्थन मिला है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी एक्स पर ‘BJP बनाम CJP’ लिखकर इसका समर्थन किया है, जो कि अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

ज़मीनी स्तर पर भी इसका असर दिखा, जब दिल्ली में कॉकरोच की वेशभूषा में युवा स्वयंसेवकों ने यमुना नदी के किनारों की सफाई करके अपना विरोध दर्ज कराया।

आलोचना: दूसरी ओर, CJP की आलोचना भी हो रही है। कुछ लोग दिपके के साल 2022 से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए काम करने के इतिहास को लेकर इसे ‘आप का प्रोडक्ट’ बता रहे हैं। वहीं कुछ आलोचकों का कहना है कि अमेरिका में बैठकर सोशल मीडिया पर ‘जोक’ बनाना आसान है, जबकि भारत में लोग जेल जा रहे हैं।

आगे की राह?

एक्स हैंडल ब्लॉक होने और आलोचनाओं के बावजूद, 13 मिलियन से अधिक इंस्टाग्राम फॉलोअर्स के साथ CJP ऑनलाइन स्पेस में एक बड़ी ताकत बन चुकी है। अगले कदम के बारे में पूछे जाने पर दिपके ने कहा, “हम कुछ योजना बना रहे हैं। हो सकता है मैं भारत वापस आऊं। यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि हमें लोगों से कैसा फीडबैक मिलता है।”

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