बंद ही रहेगा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का X अकाउंट: दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली तत्काल राहत, समीक्षा समिति करेगी जांच

Delhi High Court On Cockroach Janata Party: कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी (CJP) को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया एक्स अकाउंट (X account) को तुरंत बहाल करने से इनकार कर दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके (abhijit dipke) की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पुरुषैन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि अकाउंट को तुरंत बहाल नहीं किया जा सकता है।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पुरुषैन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि इसके दूरगामी परिणाम होने के कारण वह सरकार की बात सुनने के बाद ही कोई कदम उठाएगा। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी।
बता दें कि भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कथित टिप्पणी को लेकर शुरू की गई कॉकरोच जनता पार्टी अपने कैंपेन और अनोखे प्रतीकों और डिजिटल अभियान की पॉलिसी की वजह से चर्चा का विषय बना हुआ है। इसका एक्स हैंडल 21 मई को भारत में ‘ब्लॉक’ कर दिया गया था। इसके बाद ‘कॉकरोच इज बैक’ नाम से नए हैंडल बनाया गया था, जिसके मौजूदा समय में 2.27 लाख से अधिक फॉलोअर्स है। 16 मई को शुरू हुई सीजेपी का दावा है कि उसका मकसद युवाओं की आवाज को मजबूत करने और सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए युवाओं के लिए एक स्वतंत्र आंदोलन खड़ा करना है।
कैसे शुरू हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ट्रेंड
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ट्रेंड उस विवाद के बाद शुरू हुआ जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कथित टिप्पणी को लेकर चर्चा हुई थी। बताया गया कि वरिष्ठ वकील का दर्जा देने से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कथित तौर पर ‘परजीवी’ और ‘कॉकरोच’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। यह पूरा विचार इसी विवाद से प्रेरित था। हालांकि बाद में मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था और उनकी टिप्पणी सिर्फ फर्जी और गलत डिग्री लेकर कानूनी पेशे में आने वाले लोगों के लिए थी।
मीम्स और व्यंग्य से वायरल हुई पार्टी
इसके बावजूद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। कॉकरोच को चुनाव चिन्ह बनाकर मीम्स, व्यंग्य, ग्राफिक्स और राजनीतिक टिप्पणियों के जरिए इस अभियान को आगे बढ़ाया गया। इस प्लेटफॉर्म पर बेरोजगारी, परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था जैसे युवाओं से जुड़े मुद्दों को व्यंग्यात्मक घोषणापत्र और चुनावी अभियान की शैली में पेश किया जाता था। अभिजीत दिपके ने इस आंदोलन को ‘आलसी और बेरोजगार लोगों की आवाज’ बताया था।



